इंदौर की संगत इन तीर्थों में एकत्र होती है, जो हर आगंतुक का प्रार्थना, लंगर और निष्काम सेवा से स्वागत करते हैं।
स्थान: इंदौर, मध्य प्रदेश
गुरु नानक देव जी अपनी दूसरी उदासी के दौरान लगभग 1568 (या 1517) में इंदौर पधारे और इसी स्थान पर एक इमली के वृक्ष के नीचे विश्राम किया।
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स्थान: इंदौर, मध्य प्रदेश
गुरुद्वारा उस पवित्र स्थल को चिह्नित करता है जहाँ गुरु नानक देव जी अपनी दूसरी उदासी (धर्म-प्रचार यात्रा) के दौरान, लगभग 1567 में, पधारे।
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वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह — खालसा सर्वशक्तिमान का है, और विजय भी उन्हीं की है।
— सिख अभिवादन