ताप्ती के तट पर, बुरहानपुर के तीन तीर्थ गुरु नानक देव जी और गुरु गोबिंद सिंह जी के दो सदियों के अंतर पर हुए आगमन के साक्षी हैं।
स्थान: बुरहानपुर
ताप्ती के तट पर, जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी ने वृद्ध वैरागी जीवन दास को जन्म-मरण के चक्र से मुक्त किया।
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स्थान: जयसिंहपुरा, बुरहानपुर
जहाँ गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी संगत और जत्थेदारों को सिख तख़्तों की देखभाल के लिए घर भेजा।
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स्थान: संजय नगर, बुरहानपुर
जहाँ गुरु नानक देव जी ने ताप्ती के तट पर किले के भीतर डेरा डाला और अपने श्रद्धालु जीवन दास से भेंट की।
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वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह — खालसा सर्वशक्तिमान का है, और विजय भी उन्हीं की है।
— सिख अभिवादन