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सिख विरासत एवं पवित्र स्थल

गुरुद्वारा आकोई साहिब

आकोई — संगरूर, पंजाब
आस्था  ·  सेवा  ·  संगत  ·  विरासत

संबद्ध - श्री गुरु नानक साहिब जी, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी, श्री गुरु तेग बहादुर जी

गुरुद्वारा श्री आकोई साहिब
आकोई
संगरूर  ·  पंजाब

संबद्ध - श्री गुरु नानक साहिब जी, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी, श्री गुरु तेग बहादुर जी

श्री गुरु नानक साहिब जी 1504 में इस स्थान पर पधारे। उस समय यहाँ घना जंगल था। गुरु जी ने संगत को आशीर्वाद दिया और कहा कि एक दिन यहाँ नगर बसेगा और फलेगा-फूलेगा। गुरु जी यहाँ नानकियाणा साहिब, गाँव मंगवाल से आए थे।

श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी 1616 में इस स्थान पर पधारे। कुछ साधुओं ने ननकमत्ता में श्री गुरु नानक साहिब जी का पीपल का वृक्ष जला दिया था। इसलिए बाबा गुरदित्ता जी (श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के ज्येष्ठ पुत्र) के अनुयायी आलमसत ने गुरु जी से ननकमत्ता पधारने की विनती की।

अमृतसर से ननकमत्ता जाते हुए गुरु हरगोबिंद मानक चंद जी की गहरी भक्ति के कारण इस स्थान पर रुके। लोगों ने गुरु हरगोबिंद की प्रेम और श्रद्धा से सेवा की।

वह करीर का वृक्ष, जिससे गुरु हरगोबिंद ने अपना घोड़ा बाँधा था, आज भी यहाँ मौजूद है।

स्मृति
श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी
पता
Akoi Sahib Channa Road, Sangrur, Punjab 148001, India
"
वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह — खालसा सर्वशक्तिमान का है, और विजय भी उन्हीं की है।
— सिख अभिवादन
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