हरिद्वार की संगत तीन पावन स्थलों पर एकत्र होती है, जिनमें से प्रत्येक गंगा तट की इस प्राचीन नगरी में गुरु साहिबान की यात्राओं का अपना अध्याय समेटे है।
स्थान: कनखल, हरिद्वार, उत्तराखंड
उन वर्षों का स्मारक जो गुरु अमर दास जी ने गुरु नानक देव जी के अनुयायी बनने से पहले यहाँ तीर्थयात्रा और प्रार्थना में बिताए।
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स्थान: हर की पौड़ी, हरिद्वार, उत्तराखंड
जहाँ गुरु नानक देव जी ने स्नान करते तीर्थयात्रियों को सिखाया कि केवल कर्मकांड दिवंगतों तक नहीं पहुँच सकता।
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स्थान: गेंडीखाता, हरिद्वार, उत्तराखंड
जहाँ गुरु नानक देव जी ने तीन माह से अधिक समय ध्यान किया और स्थानीय लोगों को एक पावन बावली भेंट की।
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वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह — खालसा सर्वशक्तिमान का है, और विजय भी उन्हीं की है।
— सिख अभिवादन